बदनोर का किला 
बदनौर नगर राजस्थान राज्य के भीलवाड़ा ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है।

बदनोर का प्राचीन नाम वर्धनपुर था । जिस पर चौहान वंशीय गुर्जर जाति के राजा #सवाई_भोज बगड़ावत का राज था । #बदनोर_किले का निर्माण भी इनके पिता श्री #बागरावत_चौहान ने अपने शासनकाल में करवाया था । इनके पास 320 गांव की रियासत थी । इन पर इनके भाई 24 बगड़ावत राज किया करते थे । इनकी राजधानी गोठा बदनोर थी । अजमेर के चौहान वंशीय गुर्जर राजाओं के वंशज थे।

.बगड़ावत राजा सवाई भोज ..
भगवान शिव के परम भक्त महाराजा भोज बगड़ावत, राजस्थान के प्रसिद्ध गुर्जर लोक देवता भगवान श्री देवनारायण जी के पूज्य पिता श्री ll भोज महाराज का शासनकाल 9 वी शताब्दी लगभग माना जाता है इन्होंने अपनी प्रसिद्ध राजधानी बदनोर से स्थानांतरण करके गढ़ गोठा को स्थापित की थी , भोज महाराज धनवान तथा पराक्रमी गऊ रक्षक शासकों में से एक थे ll
बगड़ावत गुर्जरों ने अपना यश और कीर्ति दूर-दूर तक स्थापित की बड़े-बड़े राजा सामंतों के साथ व्यवहार स्थापित किए मारवाड़ के समस्त राजा बगड़ावतों का अपना धर्म भाई के रूप में मानते थे और सदा गुरु बाबा रूपनाथ जी का आशीर्वाद बना रहता था ll
बगड़ावत महाराज श्री #सवाईभोज , बगड़ावत गुर्जर वंश के महान और लोकप्रिय राजा थे l अजमेर के चौहान गुर्जर वंश के ही राजकुमार थे जो आगे चलकर बगड़ावत शाखा का निर्माण किया ll

बगड़ावतों का दरबारी कवि चूचू छुछू भाट

बगड़ावत गाथा 
 कुलभाट छोटू भाट ने समस्त बगड़ावतों को सूचित किया कि बदनोर की धरती पर राज करने से कुछ नहीं होगाll हे गुर्जर रणधीरो समस्त मारवाड़ पर छा जाओ मारवाड़ के समस्त राजा रजवाड़ो पर नियंत्रण करें और अपना यश प्राप्त करें दूर-दूर तक अपनी ख्याति फैला दो या तो जन्म का बेर हो जाएगा या हो जाएगा जन्म का व्यवहार यहां बात सुनकर सूरमा नेवाजी जी अपने आसन से उठ खड़े होते हैं और महाराज भोज के समक्ष आते हैं कहते हैं कि दादा भोज अगर आपकी आज्ञा हो तो हम आज ही समस्त रजवाड़ों से मित्रता हेतु आज ही निकलें महाराज भोज ने कहा ठीक है भाइयों हम गुरु बाबा रूपनाथ जी का आशीर्वाद लेकर जल्दी ही निकलेंगे भोज ने अपने दरबारी कवि छोटू भाट को आदेश दे दिया हमारे घोड़े हाथी तैयार किय जाए और हम राजा दुर्जन साल से मिलने हेतु योजना बनाते हैं। अपने सभी घोड़ो को सोने के जेवर पहना दो। साडू माता नियाजी से पूछती है कि इतनी रात को कहाँ जाने की तैयारी है। नियाजी उन्हें अपनी योजना के बारे में बताते हैं और फिर सारे भाई राण की तरफ निकल पड़ते हैं हाथी घोड़े साथ में लंबा चौड़ा काफिला लेकर महाराज भोज चामुंडा अवतार बंवली घोड़ी पर सवार हो जाते हैं ढोल नगाड़े बजते जाते हैं हाथी पर शिवजी की ध्रुनी लगाई जाती है। रास्ते में उन्हें पनिहारिने मिलती हैं और बगड़ावतों के रुप रंग को देखकर आपस में चर्चा करने लगती हैं। आगे जाकर उन्हें राण के पास एक खूबसूरत बाग दिखाई देता है, जिसका नाम नौलखा बाग होता है। वहां रुक कर सभी भाईयों की विश्राम करने की इच्छा होती है। यह नौलखा बाग रावजी दुर्जनसाल की जागीर होती है।नियाजी माली को कहते हैं कि पैसे लेकर हमें बैठने दे, लेकिन माली बगड़ावतों को वहां विश्राम करने से मना कर देता है और कहता है की चाबी गढ़ भीनय का राजा ले गए हैं और बगड़ावत गुर्जरों से मनगढ़त बातें करता रहता है यहां देख कर बगड़ावतों का दरबारी कवि कहता है कि हे भोज महाराज चाबी इसी के पास है यह हमें बातों में उलझा रहा है यहां सुनकर महाराज निया कुमार को गुस्सा आ जाता है और अपने हाथियों से बाग का किवाड़ तुड़वा देते हैं और वहां के मालि कों को खूब मारते हैं और सारे वन  को नष्ट कर देते हैं माली रोता रोता दरबार में जाता है और कहता है कि कुछ सरदार आए हैं जिनके पास में हाथी घोड़े और बड़ी-बड़ी तोप हैं जो अपने आप को गुर्जर चौहान बताते हैं और ठिकाना बदनोर गोटा बताते हैं उन्होंने आपका बाघ को नष्ट कर दिया है !!