1• खेडा चौसला- यह कस्बा गुलाबपुरा जिला
भीलवाडा (राज.) में हे ! बगडावतो ने इसे बसाया
था।
2• बदनौर - बगडावतो के पिता बाघरावजी ने इसे
बसाया था।
3• माण्डल गढ़- यह कस्बा भी भीलवाडा जिला
(राज.) मे है , इसे बाघजी के दादा अर्थात
बगडावतो के परदादा माण्डल जी ने बसाया था /
यहां उनका बनाया तालाब भी है , जो माण्डल का
तालाब कहलाता हैं।
4• धडावत- यह स्थान आसीन्द-
तहसील
जिला-भीलवाडा में खारी नदी के
तट पर हैं ! यहां
बगडावतों के महलों के अवशेष हैं यही पर
ही गढ
गोठा थी।
5• अजमेर- बगडावतों के पुर्वज अजयराज
चौहाण गुर्जर ने अजमेर बसाया था हरिरामजी
भी
अजमेर के घाटा बान्दरोल ,नागपहाड के पास मे
रहते थे,यही पर उनका विवाह ,बूढा पुष्कर के
गुर्जर -ग्राम के जगरुप गुर्जर की पुत्री
लीला
का विवाह हरिराम से हुआ था ,जिससे उनके एक
ही पुत्र बाघजी हुए।
6• आसीन्द- यह आशा बगडावत ने बसाया
था,वर्तमान यह तहसील भीलवाडा जिले मे
7• आसींद सवाईभोज - यह वह स्थल हैं जहां बगडावत भारत नामक युद्ध हुआ था, आशा बगडावत ने अपने नाम से ग्राम बसाया था आसीन्द , वह
आज तहसील हैं भीलवाडा जिले मे
खारी नदी के
तट पर,आसीन्द से दो किलोमीटर पुर्व में
सवाईभोज मंदिर हैं जो युद्ध स्थल पर बना हैं ,
500 बीघा भुमी मंदिर के
अधीन हैं, यहां पर
राजा सवाईभोज के मंदिर के अलावा अन्य बगडावतो के
मंदिर भी हैं , छोछु भाट का मंदिर भी हैं ,
यहां
बगडावतो के पुत्र भुणा जी , भांगी
जी , व
देवनारायण के मंदिर भी हैं , यहां सती
स्थल भी है
, राणी जयमती का मंदिर यही
हैं, बगडावतो की
23 राणियां जो सती हुई थी
उनकी देवलियां यहां
बनी हैं।
8• रायला - यह कस्बा भी भीलवाडा में
आसीन्द
से 30-40 किमी पर बसा हैं , सवाईभोज
की पुत्री
दीप कंवर यहां विवाही थी
तथा उसने राणा से युद्ध
किया था तथा प्राण गवाय , कहावत है की और
जगह तो वीर लडत हैं, रायला मे लडे लुगाई "
दीप
कंवर के युद्ध के कारण बनी हैं।
9• ताम्बेसरी बावडी - यह
बावडी महाराज सवाईभोज से
पुर्व में 9 किलोमिटर पर हैं , बगडावतो ने इसे
बनवाया था , बगडावत भारत के बाद साढू माता
यही रही थि।
10• मालासेरी डुंगरी - ताम्बेसर
बावडी से थोडी
दुर यह डुंगरी हैं जहां पर भगवान देवनारायण का
जन्म हआं था !
11• देवमाली- यहां देवनारायण का प्राचीन
विशालमंदिर हैं, यह आसीन्द से 40
दुर हैं , यहां देवनारायण ने निवास किया था।
12• वरना धाम - यहां भी देवनारायण का मंदिर हैं
, अन्त समय में देवनारायण यही रहते थे!
13• गढगौठा (दडावट) - को श्री देवनारायण ,
भूणाजी ,मेंदू जी तथा
भांगीजी ने माता साडू के
आदेश पर पुन: बसाया था, यहां रहते हुए माता
साडू की कामना ( राणा को जीतकर )
पुरी की थी !!
(14).खारी नदी - यहां गुर्जर चौहान बगड़ावतों का महायुद्ध हुआ था जिसे हम बगड़ावत भारत के नाम से जानते हैं !!
(15) राठौड़ा का तालाब - इस तालाब का निर्माण गुर्जर महाराजा सवाई भोज ने अपनी माता लखमा दे राठौड़ी की याद में और प्यासी गौ माता, प्रजा के हित के लिए करवाया था वर्तमान में यहां भगवान श्री देवनारायण और सवाई भोज का मंदिर निर्मित है !!
(16). राण भिनाय- जब 24 बगड़ावत सहित गुर्जर राजा सवाई भोज रानी जयमती को भिनाय से भगाकर गढ़ गोठा की ओर ले जा रहे थे तब मार्ग में एक चट्टान के दो टुकड़े करके सवाई भोज महाराज ने अपनी वीरता का परिचय दिया था कि हम 24 भाई 52 गढ़ के राजाओं की फौज अकेले ही गाजर मूली की तरह काट देंगे और रानी जयमती को वचन दिया था कि हम गुरु बाबा लोकनथ के द्वारा दी गई चंद्र राशि तलवार का प्रयोग भारत युद्ध में नहीं करेंगे !!
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